दीवानी बार एसोसिएशन ने अधिवक्ता प्रकरण को लेकर न्यायिक कार्य से विरत रहे
दीवानी बार एसोसिएशन ने अधिवक्ता प्रकरण को लेकर न्यायिक कार्य से विरत रहे l
मड़ियाहूं।स्थानीय नगर के गंज मोहल्ला निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता दीवानी न्यायालय गोपाल चंद्र केशरी के पुस्तैनी व उनके हिस्से की जमीन पर दबंगो द्वारा जबर जस्ती अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा था जिसको अधिवक्ता ने रोका तो दबंग पंकज केशरी व चंदन केशरी ने लोहे के रॉड से हमला बोल दिया जिससे अधिवक्ता गोपाल चंद केशरी बुरी तरह से घायल हो गए इसकी सूचना मिलते ही अधिवक्ता के पुत्र रवि कुमार केशरी बीच बचाव करने पहुचे तो उन्हें भी मार पिट कर घायल कर दिया गया जबकि उस जमीन पर मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है व मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा स्थगन आदेश भी पारित किया गया है तथा नगर पंचायत मडियाहू द्वारा नक्शा भी नहीं स्वीकृत किया गया है फिर भी दबंगई के बल बुते इस तरह की घटिया हरकत की जा रही है।जब पीड़ित इसकी शिकायत थाना कोतवाली में किया तो उल्टे घायल वरिष्ठ अधिवक्ता 61 वर्षीय बुजुर्ग अधिवक्ता व उनके पुत्र रवि कुमार केशरी को थाने में बैठा दिया गया हद तो तब हो गई जब पुलिस दबंगो का साथ देते हुए उनका मेडिकल कराया और घायल गोपाल चंद केशरी का कोई उपचार नही कराया और शाम 06:00 बजे से रात्रि भर लॉकअप में बंद किया गया जबकि उनकी उम्र लगभग 61 वर्ष है।पुलिस ने तो मानवाधिकार के नियमो घोर उलंघन किया हैऔर उल्टे पुलिस प्राथमिकी में अधिवक्ता को फरार भी बता रही है यह कैसी विडंबना है। जब इसकी सूचना जौनपुर दीवानी बार काउंसिल को मिली तो इसपर सारे अधिवक्ता नाराज होकर न्यायिक कार्यो का वहिष्कार करते हुए तत्काल मड़ियाहूं कोतवाली पहुचकर हो हंगामा खड़ा कर दिया ।
और कोतवाल के ऊपर घूसखोरी का आरोप भी लगाया और इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से करते हुए थानाध्यक्ष मड़ियाहूं को तत्काल निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाने की मांग किया है। वही जब इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता गोपालचंद केशरी से से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मेरे साथ संपूर्ण घटना कस्बा इंचार्ज लल्लन सिंह एवं कोतवाली में तैनात मुख्य मुंशी कमलेश तिवारी द्वारा अपमानित किया गया। तथा मोबाइल भी छीनकर अपने पास रख लिया, और अधिवक्ता को सुबह 10:30 बजे दीवानी न्यायालय के पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष समर बहादुर यादव के साथ अन्य अधिवक्ताओं के आने पर उन्हें छोड़ा गया और बाद में उन्हें भी फरार दिखाकर 107/116 में अभियुक्त बनाया गया।

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